राजस्थान के जैन तीर्थ स्थल महावीर जी में पूर्व दस्यु देंगे विश्व जल शांति का संदेश, जारी करेंगे जल आत्मनिर्भर भारत बनाने का रोडमैप

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NCRkhabar@Bhiwadi. राजस्थान (Rajasthan) के करौली जिले (Karauli District) में स्थित जैन तीर्थ स्थल श्री महावीर जी में पूर्व दस्यु जल संरक्षण का संदेश देंगे। आगामी 20 व 21 मार्च को आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में जनमानस की ओर से जल संरक्षण घोषणा पत्र का एलान चंबल के बीहड़ों में जल संरक्षण कर जीवन संवारने वाले पूर्व दस्यु करेंगे। इसकी जानकारी देते हुए जल पुरुष राजेंद्र सिंह (Water Man Rajendra Singh) ने कहा कि लोकसभा आम चुनाव में सभी राजनीतिक दल देश की जल धरोहर को समृद्ध करने और प्रत्येक देशवासी को उसके हिस्से का जल मुहैया करवाने के लिए घोषणापत्र में स्पष्ट उल्लेख करें। भारत को 2047 तक जल आत्मनिर्भर बनाने का वाटर एजेंडा तभी सम्भव हो सकेगा जब जल उप्लब्धता के साथ-साथ जल संवर्धन, संरक्षण के लिए भी स्पष्ट इच्छाशक्ति को प्रत्येक राजनीतिक दल रोडमैप के तौर पर अपने चुनावी घोषणापत्र में बताएं।

 

पूर्व दस्यु बताएंगे जीवन मे बदलाव की कहानी

 जल पुरुष राजेन्द्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष को संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व जल शांति वर्ष घोषित किया है। इस मौके पर 20 और 21 मार्च 2024 को जैन तीर्थ महावीर जी, बनबरीपुर करौली, राजस्थान में जल एवं शांति लोक सम्मेलन में दिया जाएगा।  सम्मेलन में चंबल क्षेत्र के  बंदूक  छोड़कर, अपना जीवन पानी के काम के लिए समर्पित करने वाले शांतिदूत बने दस्यु  जल उपलब्धता के बाद उनके जीवन मे आए बदलाव का पूरी दुनिया के सामने बयां करेंगे। मैग्सेसे पुरस्कार (Magsese Award Winner) से सम्मानित राजेन्द्र सिंह ने बताया कि इन लोगो का सम्मान करने, चेतना और उनकी पहचान दुनिया को पता चले,जिससे प्रेरित होकर दुनिया में अन्य लोग भी इस तरह के काम कर सके। क्योंकि भारत शांति का दूत रहा है,  इसलिए यह कार्य संभव हुआ है, लेकिन  दुनिया के दूसरे देशों में भी ऐसे काम हो, उसके लिए यह सम्मेलन आयोजित कर रहे है।  भारत के चंबल क्षेत्र में शांति का वास्तविक काम लोगों ने किया है। जो चंबल का इलाका आज से 10 साल पहले तक बंदूकों की आवाज से गूंजता रहता था, वह क्षेत्र अब शांति में बदल गया है ।

चंबल के बीहड़ दे रहा शांति का संदेश

कभी चंबल का करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर का इलाका दहशत के लिए जाना जाता था लेकिन अब शांति का संदेश देने वाला देने वाला क्षेत्र बन गया है। यहां पहले लोग बंदूक लेकर इसलिए घूमते थे क्योंकि पानी  नहीं था।  जल संकट के कारण खेती नहीं होती थी और कहीं तो पीने तक का पानी नहीं था। चंबल की सारी सहायक नदियां सूख कर मर गई थी लेकिन इस साल कम बारिश में भी चंबल की सहायक नदियां पार्बती,तेवर, नोहरा ,भवनी इस तरह की दर्जनों नदी अब पानीदार बनकर बह रही है।  यह काम किसी सरकार ने नहीं किया। यह काम वहां के लोगों ने स्वयं तरुण भारत संघ (Tarun Bharat Sangh) के साथ मिलकर किया है। तरुण भारत संघ ने इस क्षेत्र में जहां-जहां जल का संकट था, उस संकट के समाधान के लिए इन लोगों को प्रेरित करके, तैयार करके पानी के काम में लगा दिया। जब इनके पास पानी आया तो, उन्होंने बंदूक के छोड़ दी और बंदूक के छोड़कर यह पानी के काम में लग गए  और खेती करने लगे।
मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित जल पुरुष राजेंद्र सिंह।

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