तिजारा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व भाजपा के बीच हो सकती है कड़ी टक्कर, कांग्रेस के टिकट के बाद बदलेगा मेवात का मिजाज

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NCRkhabar.Com. केंद्रीय चुनाव आयोग ने राजस्थान विधानसभा चुनाव ( Rajasthan Assembly Election) की तारीखों का ऐलान कर दिया है और 25 नवंबर को सभी 200 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। वहीं तीन दिसंबर को चुनाव नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। मेव मुस्लिम बहुल राजस्थान की तिजारा विधानसभा सीट से भाजपा ने अलवर सांसद बाबा बालकनाथ को प्रत्याशी घोषित कर दिया है जबकि कांग्रेस ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। बहुजन समाज पार्टी ने बिल्डर से नेता बने ईमरान खान को अपना प्रत्याशी घोषित किया है जबकि भाजपा से टिकट से वंचित रहे पूर्व विधायक मास्टर मामन सिंह यादव निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। कांग्रेस में भी टिकट को लेकर मंथन चल रहा है और नवरात्रि के दौरान पहली सूची जारी होने की उम्मीद की जा रही है। तिजारा विधानसभा के मेवात हल्के के लोगों को कांग्रेस के टिकट का बेसब्री से इंतज़ार है तथा वे इस बार कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने का मन बना चुके हैं। इस बार चौधरी फ़ज़ल हुसैन (Chaudhary Fazal.Hussain) कांग्रेस पार्टी से टिकट के प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं औऱ वह क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं जबकि पूर्व मंत्री दुर्रू मियां के सामने बढ़ती उम्र व तिजारा में सक्रिय नहीं होना टिकट की राह में रुकावट बन रही है। कांग्रेस से चौधरी फ़ज़ल हुसैन ही भाजपा प्रत्याशी बाबा बालकनाथ को कड़ी टक्कर देने का दमख़म रखते हैं, क्योंकि उनके पास कर्मठ कार्यकर्ताओं की लंबी-चौड़ी फौज है और वह मेवात के चौधरी होने की वजह से क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते है। चौधरी फ़ज़ल हुसैन का गांव-गांव ढाणी में लोगों से सीधा जुड़ाव है तथा शहरी क्षेत्र के लोगों से भी अनजान नहीं हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इस बार तिजारा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव विकास के बजाय जाति व धर्म के आधार पर होने वाला है और भाजपा ने काफ़ी सोच-विचार कर अलवर सांसद बाबा बालकनाथ को टिकट दिया है।

खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल करना चाहती है कांग्रेस

पिछले दो चुनाव से तिजारा सीट हार रही कांग्रेस पार्टी इस बार हर हाल में जीत हासिल करना चाहती है। इसलिए काफ़ी सोच-विचार कर ऐसे उम्मीदवार पर दांव लगाना चाह रही है, जो तिजारा में जीत का परचम लहरा सके। वहीं मेवात के लोग पिछले दस साल से खुद को सत्ता से दूर होने का खामियाजा भुगत रहे हैं। पुलिस थानों व सरकारी महकमों में सुनवाई नहीं होने एवं विकास कार्यों की रफ़्तार धीमी होने से मेवात का वोटर इस बार कांग्रेस के पक्ष में खड़ा दिखाई दे रहा है। उसे यह महसूस हो गया है कि अपना उम्मीदवार ही मेवात का पिछड़ापन दूर कर सकता है। राजस्थान में कांग्रेस व भाजपा दो प्रमुख राजनीतिक दल हैं और तीसरे दल के लिए यहां उपजाऊ जमीन नहीं दिखाई दे रही है। सत्ता की बागडोर कांग्रेस व भाजपा के हाथ मे रहती है। अन्य दल यहां खुद के दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं। अहीरवाल क्षेत्र का वोटर जहां भाजपा प्रत्याशी बाबा बालकनाथ के पक्ष में खड़ा दिखाई दे रहा है, वहीं मेवात का वोटर परंपरागत रूप से कांग्रेस समर्थक होने के कारण उसके उम्मीदवार के पक्ष में वोट करने के लिए मानस बना रहा है। अन्य दलों के उम्मीदवार चुनाव भले ही जीत हासिल नहीं कर सकें लेकिन कांग्रेस व भाजपा उम्मीदवारों का खेल अवश्य बिगाड़ सकते हैं। बहरहाल कांग्रेस उम्मीदवार का ऐलान होने के बाद ही चुनावी तस्वीर साफ हो सकती है।

 

 

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