


भिवाड़ी में औद्योगिक इकाइयों को नए प्रदूषण मानकों की जानकारी दी गई, पीएम उत्सर्जन की सीमा 50 मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर तय
ncrkhabar@Bhiwadi.भिवाड़ी में औद्योगिक वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने उद्योगों को उत्सर्जन मानकों और ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। रेड अलर्ट की स्थिति में जांच के दौरान प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों में अनियमितता या निर्धारित उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित औद्योगिक इकाई को बिना पूर्व नोटिस बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है। इस संबंध में मंगलवार को पथरेड़ी स्थित एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर में जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में भिवाड़ी क्षेत्र की 100 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भिवाड़ी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी जसबीर सिंह व सचिव जीएल स्वामी, भिवाड़ी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण लांबा और लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे जबकि प्रदूषण नियंत्रण मंडल भिवाड़ी की ओर से क्षेत्रीय अधिकारी अमित जुयाल, अंकुर पाठक, रोहित मीणा, सुमित दहिया और अश्विनी बेनीवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान उद्योगों को बैग फिल्टर सहित वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को चालू रखने, उनका नियमित रखरखाव करने और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
ऑनलाइन निगरानी में 85 प्रतिशत डेटा उपलब्धता अनिवार्य
कार्यशाला में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) की कार्यशीलता और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नए सर्वर से कनेक्टिविटी के बारे में जानकारी दी गई। संबंधित औद्योगिक इकाइयों को निगरानी के आंकड़े नियमित रूप से सर्वर पर भेजने और कम से कम 85 प्रतिशत डेटा उपलब्धता बनाए रखने को कहा गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल निगरानी प्रणाली स्थापित करना पर्याप्त नहीं है। आंकड़ों का नियमित और निर्बाध प्रेषण भी जरूरी है। सर्वर कनेक्टिविटी, डेटा उपलब्धता और तकनीकी समस्याओं का समय पर समाधान करने पर भी जोर दिया गया।राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय भिवाड़ी की ओर से आयोजित कार्यशाला में बताया गया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देश संख्या 98 के तहत संशोधित पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) उत्सर्जन मानक एक अक्टूबर 2026 से लागू हो चुके हैं। इन निर्देशों के दायरे में आने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए पीएम उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर निर्धारित की गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से 30 सितंबर को जारी येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट व्यवस्था के बारे में भी बताया गया। येलो और ऑरेंज अलर्ट मिलने पर उद्योगों को सुधारात्मक कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट और उसके प्रमाण सर्वर पर अपलोड करने होंगे। रेड अलर्ट की स्थिति में मंडल संबंधित इकाई का निरीक्षण करेगा। जांच में अनियमितता मिलने पर लागू प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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