
Ncrkhabar @Bhiwadi. औद्योगिक शहर भिवाड़ी में रविवार को महाराणा प्रताप जयंती पूरे उत्साह, गरिमा और सामाजिक समरसता के साथ मनाई गई। श्री राजपूत सभा समिति भिवाड़ी के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को एकजुटता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का सशक्त संदेश देने वाला आयोजन बन गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह मंशा चौक से भव्य वाहन रैली के साथ हुई। केसरिया ध्वजों, पारंपरिक वेशभूषा और देशभक्ति के नारों से सजी यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए राजस्थान आवासन मंडल सेक्टर-4 स्थित पार्क पहुंची। रैली के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया, जिससे वातावरण में गौरव और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। युवा, बुजुर्ग और महिलाएं—सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और भी खास बना दिया।
पार्क में आयोजित मुख्य समारोह में समाज की प्रतिभाओं, शिक्षा, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सर्व समाज की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि महाराणा प्रताप किसी एक जाति या वर्ग के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के प्रेरणास्रोत हैं।

संघर्ष, त्याग और स्वाभिमान का प्रतीक थे महाराणा प्रताप
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नाहटा फाउंडेशन के ट्रस्टी एवं पार्षद अमित नाहटा ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन संघर्ष, त्याग और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में उनके आदर्शों को अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि “जब हम ‘मैं’ की भावना से ऊपर उठकर ‘हम’ की सोच को अपनाएंगे, तभी समाज और राष्ट्र सशक्त बन पाएगा,”। नाहटा ने कहा कि महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में अनेक युद्ध लड़े, लेकिन उनका उद्देश्य कभी व्यक्तिगत लाभ नहीं रहा। उन्होंने हर संघर्ष जनता और मातृभूमि की रक्षा के लिए किया। यही कारण है कि वे आज भी हर भारतीय के दिल में जीवित हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
कार्यक्रम में श्री राजपूत सभा समिति के अध्यक्ष धर्मवीर सिंह, संजीव जादौन, लाखन सिंह राठौड़, हरेंद्र सिंह चौहान, मनोज सोनी, जितेंद्र यादव, दीपक चौहान और अशोक सिंह सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। भिवाड़ी जैसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक शहर में इस तरह के सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन न केवल परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास और मूल्यों से भी जोड़ते हैं। महाराणा प्रताप जयंती का यह आयोजन इसी दिशा में एक प्रेरणादायक पहल साबित हुआ, जिसने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो वह किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है।



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