

ncrkhabar@Nimli (Rajasthan). हालिया State of India’s Environment 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण निगरानी प्रणाली देश की आबादी और प्रदूषण की जटिलता के अनुरूप नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल 15% भारतीय – लगभग 2 करोड़ लोग – ही 10 किलोमीटर के दायरे में लगातार वायु गुणवत्ता मॉनिटर के तहत आते हैं। शेष 85%, यानी 12 करोड़ से अधिक लोग, बिना किसी मापनीय निगरानी के हवा में सांस ले रहे हैं।
रिपोर्ट के लेखक और CSE Urban Lab की डिप्टी प्रोग्राम मैनेजर शरणजीत कौर का कहना है कि “पूरे जिले, औद्योगिक क्षेत्र और तेजी से बढ़ते उप-शहरी इलाके निगरानी नेटवर्क से बाहर हैं।”
भारत में मॉनिटरिंग का हाल
भारत में वायु प्रदूषण मॉनिटरिंग के दो मुख्य तरीके हैं:
National Air Quality Monitoring Programme (1984-85): साप्ताहिक दो बार मापने वाले मैनुअल स्टेशन।
Continuous Air Quality Monitoring Stations (सीएक्यूएमएस): रीयल-टाइम, घंटा-घंटा डेटा।
वर्तमान में भारत में 562 रीयल-टाइम और 966 मैनुअल मॉनिटर हैं। हालांकि ये संख्या प्रभावशाली लगती है, लेकिन ये केवल बड़े शहरों में केंद्रित हैं।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का अंतर
चंडीगढ़: हर निवासी 10 किमी के भीतर मॉनिटरिंग के दायरे में।
दिल्ली: केवल 3.5% आबादी बाहर।
पुडुचेरी: लगभग 50% क्षेत्र कवर।
बिहार: 13% आबादी कवर।
उत्तर प्रदेश: केवल 9% आबादी कवर।
पश्चिम बंगाल: केवल 19% आबादी कवर; होगली और मुरशिदाबाद जिलों में कोई रीयल-टाइम मॉनिटर नहीं। पूर्वोत्तर: केवल असम में कुछ स्टेशन; बाकी राज्यों में 1-2 स्टेशन ही मौजूद।
शरणजीत कौर के अनुसार, “भारत के 742 जिलों में से 64% से अधिक जिलों में कोई लगातार मॉनिटर नहीं है।” CSE की अनुसंधान निदेशक और शहरी स्थिरता विशेषज्ञ, अनुमिता रॉयचौधरी कहती हैं कि भारत को अब “हाइब्रिड नेटवर्क” अपनाना होगा, जिसमें रीयल-टाइम गुणवत्ता वाले मॉनिटर, मान्यताप्राप्त कम लागत वाले सेंसर, उपग्रह आधारित डेटा को जोड़कर, अधिक सटीक और व्यापक निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही स्कूल, अस्पताल जैसे हाई-रिस्क क्षेत्र में निगरानी प्राथमिकता देनी चाहिए। रॉयचौधरी ने यह भी जोर दिया कि भारत को संगठित और ओपन डेटा पोर्टल की आवश्यकता है, जो विभिन्न एजेंसियों से डेटा को एक जगह उपलब्ध कराए।



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