Bhiwadi Cyber Crime: 7 राज्यों में ठगी करने वाले बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश, 10 आरोपी गिरफ्तार; 18 मोबाइल और 3 वाहन जब्त

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crime@ncrkhabar.com-bhiwadi.NCR क्षेत्र में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। भिवाड़ी और खैरथल-तिजारा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए देश के सात अलग-अलग राज्यों में लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में गिरोह के 10 शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि उनके कब्जे से 18 मोबाइल फोन, 15 सिम कार्ड, आधार कार्ड और 3 वाहन बरामद किए गए हैं। पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोहम्मद साद, सालिम उर्फ सुवालिम, खालिद, मौसम, शौकीन, नौशाद, सोहिन, आकिल, वसीम और सकील के रूप में हुई है।

 

7 राज्यों से जुड़े 11 मामले आए सामने

पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन के IMEI नंबर और सिम कार्ड्स की गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल पर जांच कराई गई। जांच में राजस्थान, दिल्ली, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से जुड़ी साइबर ठगी की 11 शिकायतें दर्ज मिलीं। इनमें से 7 मामलों में कुल 1,83,348 रुपये की ठगी की राशि स्पष्ट रूप से सामने आई है, जबकि अन्य 4 मामलों में राशि का विवरण अभी जांचा जा रहा है

ठगी के अनोखे और शातिर तरीके

– जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह सोशल मीडिया और लुभावने विज्ञापनों के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाता था:

– सोशल मीडिया का दुरुपयोग: फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से संपर्क करते थे।

– पुराने सिक्के और नोट: पुराने सिक्के और प्राचीन करेंसी नोटों को ऊंचे दामों पर खरीदने का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन के नाम पर क्यूआर कोड (QR Code) भेजते थे।

-फर्जी लकी ड्रॉ: ‘श्री सांवरिया सेठ उपहार योजना’ के नाम पर फर्जी लकी ड्रॉ चलाकर ठगी करना।

– वर्क फ्रॉम होम: घर बैठे चूड़ी और नटराज पेन-पेंसिल की पैकेजिंग का काम देने का लालच।

– सस्ते प्रोडक्ट्स: कम कीमत पर एचपी (HP) लैपटॉप की होम डिलीवरी का झांसा देकर एडवांस पेमेंट ऐंठना।

– साइबर ठगी अब किसी एक गांव या थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल की जांच से सात राज्यों तक इनके नेटवर्क का पता चला है। युवाओं को यह समझना चाहिए कि किसी सुनसान जगह या जंगल में बैठकर साइबर ठगी करने से वे पुलिस की पकड़ से बच नहीं सकते। डिजिटल ट्रांजैक्शन, मोबाइल और सिम के रिकॉर्ड के जरिए पुलिस आरोपियों तक आसानी से पहुंच जाती है। हमारा यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।”

– बृजेश उपाध्याय, पुलिस अधीक्षक, भिवाड़ी।

 

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