Gyanvapi case: 355 साल पुराना है ज्ञानवापी का इतिहास, जानिए कब से जारी है कानूनी लड़ाई

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Gyanvapi case:  ज्ञानवापी मामले को लेकर कानूनी जंग जारी है. हिंदू और मुस्लिम पक्ष कोर्ट के सामने अपनी-अपनी दलील दे रहे हैं. मस्जिद वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से लगी हुई है. ऐसा दावा किया जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1669 में मंदिर को तुड़वाकर इस मस्जिद की स्थापना की थी. यही दावा ज्ञानवापी विवाद की जड़ है. हिंदू पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी में भगवान शिव का स्वंयू ज्योर्तिलिंग है. इसे लेकर 1991 में पहला मामला दायर किया गया था. पिछले 32 साल से लगातार मुकदमा चल रहा है. हरिहर पांडे, सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा ने 1991 में इसे लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इसमें बताया गया था कि मंदिर के अवशेषों से ही मस्जिद का निर्माण किया गया है.

ज्ञानवापी विवाद में जानिए कब क्या हुआ

वाराणसी कोर्ट में पहली याचिका 
1991 में सबसे पहले सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और हरिहर पांडे ने भगवान विश्वेश्वर की ओर से वाराणसी कोर्ट में पहली याचिका दाखिल की थी. इस याचिका में पूजा करने की अनुमति मांगी गई थी.

कोर्ट  का पहला स्टे
1993 में ज्ञानवापी के मुकदमे में स्टे लगा दिया, कोर्ट ने दोनों पक्षों ये यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया.

सिविल कोर्ट में सुनवाई पर रोक
1998 में मामले में फिर सुनवाई शुरू हुई, लेकिन अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में ये तर्क दिया कि मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में नहीं हो सकती. हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट में मामले की सुनवाई पर रोक लगाई.

ASI सर्वे की मांग
22 साल बाद 2019 में भगवान विश्वेश्वर की ओर से विजय शंकर ने बनारस कोर्ट में मुकदमा कर ASI सर्वे कराने की मांग की. 2020 में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने याचिका का विरोध किया.

दर्शन करने की मांग पर याचिका
2021 में श्रृंगार गौरी की पूजा दर्शन की मांग करते हुए पांच महिलाओं रेखा पाठक, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी, राखी सिंह और सीता शाहू ने एक अन्य याचिका दाखिल की.

सर्वेक्षण का आदेश दे 
2022 में अदालत ने श्रृंगार गौरी विग्रह का पता लगाने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया. 26 अप्रैल 2022 को सिविल कोर्ट ने ज्ञानपावी परिसर के सर्वेक्षण का आदेश दे दिया. मई में सर्वे के दौरान ये दावा किया गया कि ज्ञानवापी में शिवलिंग की आकृति मिली है

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
जुलाई 2022 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने जिला अदालत के फैसले का इंतजार करने को कहा. दिसंबर 2022 में फास्ट ट्रैक कोर्ट में एक अन्य मुकदमे वजूखाने में मिले शिवलिंग नुमा आकृति की पूजा करने का अधिकार, मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक, अवैध ढांचे को हटाने संबंधी मामले की सुनवाई हुई.

कार्बन डेटिंग का आदेश
मई 2023 में ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग की कार्बन डेंटिंग का उच्च न्यायालय ने आदेश दिया. हालांकि सात दिन बाद सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश पर रोक लगा दी थी.

सात केसों की एक साथ सुनवाई
23 मई को 2023 को वाराणसी जिला जज की ओर से अहम निर्णय दिया गया. इसमें कहा गया कि ज्ञानवापी मामले में सभी सात केस की एक साथ सुनवाई होगी.

ASI सर्वे  पर बहस
इसी महीने 12 और 14 जुलाई को ज्ञानवापी परिसर का ASI का सर्वे कराने को लेकर भी काफी बहस हुई थी. इसमें मुस्लिम पक्ष की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई थी.

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