NCRkhabar@Jaipur. अशोक गहलोत सरकार ने उदयपुर (Udaipur) के कन्हैयालाल हत्याकांड के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करवाने में सहयोग करने वाले प्रह्लाद सिंह चुण्डावत एवं शक्ति सिंह चुण्डावत को नियमों में शिथिलन प्रदान कर कनिष्ठ सहायक के पद पर सरकारी नौकरी दिये जाने का निर्णय किया है। गहलोत मंत्रिमंडल की बुधवार को जयपुर में हुई बैठक में यह निर्णय किया गया है। राजस्थान चतुर्थ श्रेणी सेवा (भर्ती एवं सेवा की अन्य शर्तें) नियम-1999 में शिथिलन देकर दोनों को नियुक्ति दी जाएगी। इससे अदम्य साहस दिखाकर अपराधियों को पकड़वाने में सहायता करने वाले दोनों युवकों के साहस का सम्मान होगा तथा अन्य लोग भी इनसे प्रेरित होकर विषम परिस्थितियों में पहल कर पुलिस को सहयोग करने का साहस जुटा पाएंगे।
साफ्ट हिंदुत्व कार्ड खेलने की तैयारी में गहलोत सरकार
राजस्थान सरकार का सांप्रदायिक दंगों में जान गंवाने वाल्स परिवारों को आर्थिक सहायता व सरकारी नौकरी में भेदभाव कर कर रही है। उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड के बाद गुनहगारों को पकड़कर जेल भेज दिया गया औए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। गहलोत सरकार ने कन्हैयालाल के दोनों बेटों को सरकारी नौकरी देने के अलावा परिवार को 50 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक मदद किया है और अब आरोपियों को पकड़वाने वालों को भी सरकारी नौकरी देने जा रही है। वहीं नासिर-जुनैद को जिंदा जलाकर मार डालने की जघन्य घटना के बाद उसके परिवार को कन्हैयालाल के परिजनों की तरह सरकारी मदद नहीं दी गई। यही नहीं राजसमंद जिले में साल 2017 में बंगाल के मजदूर को जिंदा जलाकर मार डालने का लाईव वीडियो बनाने वाले शंभूलाल रैगर को अभी तक सजा दिलवाने में गहलोत सरकार सफल नहीं हो सकी है और ना ही गरीब मजदूर के परिवार को मदद मिल सकी है।
कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर, चुनाव में हो सकता है नुकसान
कांग्रेस के रणनीतिकार साफ्ट हिंदुत्व की तरफ पार्टी को ले जा रहे हैं। पार्टी के थिंक टैंक का मानना है कि इससे हिन्दू वोट भी मिलेगा और दलित व मुस्लिम वोटर पहले से ही उसके परंपरागत वोटर हैं। हालांकि राजनीतिक टिप्पणीकारों का मानना है कि कांग्रेस का यह प्रयोग यूपी में विफल हो चुका है तथा राजस्थान में भी मुस्लिम मतदाता कांग्रेस की चाल को समझ चुका है। कन्हैयालाल व नासिर जुनैद हत्याकांड एक जैसे होने के बावजूद आरोपियों को सजा दिलवाने व आर्थिक सहायता में किए गए भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर मुस्लिम समाज के युवाओं में काफ़ी आक्रोश है। इसका खामियाजा गहलोत सरकार को आगामी विधानसभा चुनाव में उठाना ओढ़ सकता है।
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