
NCRkhabar@Bhiwadi.कस्बे सहित आसपास के इलाकों में ईद-उल-अजहा (Eid Ul Adha) यानी बकरीद का त्योहार श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर बाजारों में पिछले कुछ दिनों से रौनक देखने को मिली, जहां मुस्लिम धर्मावलंबियों ने ईद की तैयारियों के लिए जमकर खरीदारी की। यह पर्व त्याग, बलिदान और भाईचारे का प्रतीक है, जिसे इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने जिल-हिज्जा की 10वीं तारीख को मनाया जाता है।
भिवाड़ी, कहरानी, मटीला, चौपानकी और टपूकड़ा सहित आसपास के सभी प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में ईद उल अजहा की नमाज सुबह 7:30 बजे से 8:30 बजे के बीच अदा की जाएगी। नमाज के बाद लोग हजरत इब्राहीम की सुन्नत का पालन करते हुए कुर्बानी करेंगे। इस पर्व को कुर्बानी के त्योहार के रूप में जाना जाता है, जहां दीन और नेकी की राह पर चलने का संदेश दिया जाता है।
बकरीद के दिन नमाज अदा करने के बाद बकरे की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है: पहला हिस्सा घर के लिए, दूसरा हिस्सा किसी करीबी या रिश्तेदार के लिए और तीसरा हिस्सा किसी जरूरतमंद या गरीब को दिया जाता है। यह परंपरा समाज में समानता और जरूरतमंदों की सहायता के महत्व पर जोर देती है। जयपुर डिस्कॉम के सहायक अभियंता यूसुफ खान ने बताया कि इस साल बकरीद का पर्व शनिवार से सोमवार तक मनाया जाएगा और शनिवार को मस्जिदों व ईदगाह में नमाज अदा करने के बाद लोग एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की बधाई देंगे, जो एकता और भाईचारे का प्रतीक है। इसके बाद लोग अपने-अपने घर आकर हजरत इब्राहीम की सुन्नत अदा करेंगे।
बार एसोसिएशन ऑफ भिवाड़ी प्रथम के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट शाहिद हुसैन ने बताया कि बकरीद एकता और भाईचारे का त्योहार है। उन्होंने पवित्र कुरान के फरमान का हवाला देते हुए कहा, “अल्लाह तुम्हारी कुर्बानी के गोश्त का मोहताज नहीं है।” उन्होंने आगे बताया कि अल्लाह से करीब होने का जरिया है कुर्बानी। इस अवसर पर गरीब-मोहताजों का ख्याल रखना चाहिए और अमन, सुकून, भाईचारे, ऐहतराम के साथ परदे का भी ख्याल रखना चाहिए। शुक्रवार को देर रात तक बाजारों में रौनक बनी रही, जहां लोगों ने ईद की अंतिम तैयारियों के लिए जमकर खरीदारी की।




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