दिल्ली-एनसीआर में मैक्स हॉस्पिटल का बढ़ता नेटवर्क, अब भिवाड़ी के श्रीकृष्णा हॉस्पिटल में भी मिलेगी बच्चों की हड्डी व जोड़ से जुड़ी बीमारियों के इलाज की विशेष सुविधा

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NCRKhabar@Bhiwadi (NCR). आधुनिक और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का प्रयाय मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अपनी सशक्त मौजूदगी स्थापित कर ली है। राजधानी के साकेत, पटपड़गंज, शालीमार बाग, द्वारका और वसंत कुंज सहित गुरुग्राम और गाजियाबाद में मैक्स हॉस्पिटल अपनी मल्टी-स्पेशलिटी सेवाओं के लिए प्रसिद्ध है। अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों की टीम और इंटरनेशनल मानकों के इलाज के चलते मैक्स हेल्थकेयर नेटवर्क आज मरीजों के बीच सबसे भरोसेमंद नाम बन चुका है।

मैक्स हॉस्पिटल में कैंसर केयर, कार्डियोलॉजी, न्यूरोसाइंसेज, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, आर्थोपेडिक्स, नेफ्रोलॉजी, लिवर व बोन मैरो ट्रांसप्लांट और पीडियाट्रिक सेवाएं विशेष रूप से सराही जाती हैं। दिल्ली-एनसीआर ही नहीं बल्कि उत्तर भारत, राजस्थान और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं।

अब भिवाड़ी में भी नई सुविधा

अपनी सेवाओं को और व्यापक बनाते हुए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका ने शनिवार को भिवाड़ी के श्रीकृष्णा हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स ओपीडी सेवा शुरू की है।
इसका शुभारंभ ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के सीनियर डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. दीपक रैना और पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. सुर्भित रस्तोगी की मौजूदगी में हुआ। अब भिवाड़ी के बच्चों को हड्डी और जोड़ से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली या गुरुग्राम नहीं जाना पड़ेगा। डॉ. सुर्भित रस्तोगी हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक भिवाड़ी में परामर्श और फॉलो-अप के लिए उपलब्ध रहेंगे।

विशेषज्ञों ने क्या कहा

डॉ. दीपक रैना ने कहा, “भिवाड़ी में विशेष पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स ओपीडी शुरू होने से बच्चों को समय पर एडवांस्ड डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट घर के पास ही मिलेगा। इस पहल से लंबी दूरी तय करने की परेशानी और आर्थिक बोझ कम होगा।”

वहीं, डॉ. सुर्भित रस्तोगी ने कहा कि बच्चों में हाथ-पैर का टेढ़ापन, क्लब फुट, सेरेब्रल पाल्सी, लंगड़ापन, कैल्शियम और विटामिन D3 की कमी से होने वाला रिकेट्स, हड्डियों के ट्यूमर और रीढ़ की समस्याओं जैसी दिक्कतों का शुरुआती इलाज बेहद जरूरी है। *“कई बार माता-पिता बच्चों के लक्षणों जैसे लगातार लंगड़ाना या हड्डियों में दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं।

 

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