बारिश में सिलीसेढ़ झील पर बही चादर, फिल्मों और पर्यटन से बनी पहचान

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बरसात में लबालब सिलीसेढ़ झील, झरने जैसी बहती पानी की चादर।

ncrkhabar@Alwar/Bhiwadi. मानसून की झमाझम बारिश ने अरावली की गोद में बसी सिलीसेढ़ झील को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। लगातार हो रही बारिश से झील लबालब हो गई है और सोमवार को पानी की चादर बहने लगी। झील से गिरते पानी का नजारा किसी झरने जैसा प्रतीत हो रहा है। चारों ओर हरियाली, झील का नीला पानी और बहती धाराएँ सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं।

मानसून में सैलानियों का जमावड़ा

बरसात में यहां का दृश्य इतना मनमोहक है कि बड़ी संख्या में लोग झील किनारे पहुँच रहे हैं। पर्यटक यहां पिकनिक का आनंद ले रहे हैं, नौका विहार कर रहे हैं और अपने मोबाइल कैमरों में झील की खूबसूरती कैद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी सिलीसेढ़ झील की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

फिल्मों से मिली खास पहचान

सिलीसेढ़ झील केवल प्राकृतिक सौंदर्य के कारण ही नहीं बल्कि फिल्मों की वजह से भी देशभर में पहचानी जाती है। वर्ष 1962 में राजकपूर और वहीदा रहमान अभिनीत सुपरहिट फिल्म नीलकमल के दृश्य यहीं फिल्माए गए थे। इस फिल्म की सफलता के बाद अलवर फिल्मों की शूटिंग के लिए निर्देशक-निर्माताओं की पसंद बन गया।

शाहरुख खान और सलमान खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म करण अर्जुन (1995) के कई दृश्य अलवर के बाला किला और सरिस्का टाइगर रिज़र्व में फिल्माए गए। इसी तरह श्रीदेवी और ऋषि कपूर की फिल्म चांदनी (1989) में सिलीसेढ़ और जयसमंद झील दिखाई दी। शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित की फिल्म कोयला (1997) की शूटिंग अलवर किले और मूसी महारानी की छतरी में हुई थी।
नई पीढ़ी की फिल्मों में भी अलवर की लोकेशन दिखी है। रणवीर सिंह और अनुष्का शर्मा की बैंड बाजा बारात (2010) की शूटिंग अलवर सिटी पैलेस और हवेलियों में हुई, जबकि जेपी दत्ता की मल्टीस्टारर फिल्म पलटन (2018) का कुछ हिस्सा विजय मंडल किला और अरावली की वादियों में फिल्माया गया।

पर्यटन को मिला बढ़ावा

इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम होने की वजह से अलवर हमेशा से फिल्म निर्देशकों की पहली पसंद रहा है। यहां झीलें, किले, छतरियां, मंदिर और जंगल सभी कुछ है। दिल्ली और जयपुर से नजदीक होने के कारण फिल्म क्रू और पर्यटकों के लिए भी अलवर पहुंचना आसान रहता है।

अलवर के वरिष्ठ पत्रकार प्रेम पाठक ने बताया कि फिल्मों की शूटिंग होने से सिलीसेढ़ झील और अलवर जिले को नई पहचान मिली है लेकिन कोरोना के बाद से हिंदी फिल्मों की शूटिंग नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि हर साल मानसून के मौसम में यहां पर्यटकों की भीड़ उमड़ती है। होटल, रेस्तरां और लोकल ट्रांसपोर्ट को भी इसका फायदा मिलता है। पाठक ने बताया कि राजस्थान का पर्यटन स्थल अलवर मानसून में बहती पानी की चादर, हरे-भरे अरावली पर्वत और नीले आसमान का संगम सिलीसेढ़ झील को बेहद खूबसूरत बना देता है। यही वजह है कि इसे राजस्थान के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में गिना जाने लगा है

हरियाली से घिरी अरावली की गोद में सिलीसेढ़ झील का मनमोहक नजारा।

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