खुशखेड़ा में अवैध रूप से चल रही पटाखा फैक्ट्री में सिलसिलेवार धमाकों से मचा हाहाकार, 7 मजदूरों की मौत

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Ncrkhabar@Bhiwadi.खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने न सिर्फ सात मजदूरों की जान ले ली, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुबह करीब 9:30 बजे बारूद में लगी चिंगारी ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया और सिलसिलेवार धमाकों से पूरा क्षेत्र दहल उठा। अंदर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और वे आग की लपटों में जिंदा जल गए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्र में यदि समय रहते निरीक्षण और सख्ती बरती जाती, तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी। हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया, लेकिन तब तक सात परिवारों के चिराग बुझ चुके थे। घटना की सूचना मिलते ही दमकल और पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसी अवैध फैक्ट्री संचालित कैसे हो रही थी? औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच क्यों नहीं की गई? बारूद जैसे खतरनाक पदार्थों के भंडारण और उत्पादन पर निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी?वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने मौके पर पहुंचकर मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाया और न्याय का भरोसा दिलाया, वहीं जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन स्थानीय संगठनों और मजदूर यूनियनों का कहना है कि केवल जांच के आदेश काफी नहीं हैं, जिम्मेदार अधिकारियों और फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ ठोस व दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। इस दर्दनाक हादसे ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था, औद्योगिक सुरक्षा मानकों और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण की पोल खोल दी है। अब देखना यह है कि क्या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा, या फिर सच में जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी।

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