NCRkhabar@Bhiwadi. इस साल के आखिर में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है और अगले माह के पहले पखवाड़े में आचार संहिता लागू होने की उम्मीद की जा रही है। सत्ताधारी कांग्रेस व प्रमुख विपक्षी दल भाजपा राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए हरसंभव कोशिश करने में लग गए हैं। कांग्रेस जहां सत्ता में बने रहने के लिए नई-नई योजनाओं को लागू कर आमजन को जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा राज्य में पांच साल में सत्ता बदलने की रिवायत को देखते हुए माहौल को अपने पक्ष में करने के परिवर्तन संकल्प यात्रा के जरिए जनता की नब्ज टटोल चुकी है। इसके अलावा दोनों पार्टियों की कर से कई चुनावी सर्वे करवाए गए हैं औऱ संभावित उम्मीदवारों के पैनल पार्टी आलाकमान तक भेज दिए गए हैं और नवरात्रि से पूर्व उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी होने की उम्मीद है।
भाजपा व कांग्रेस के टिकट के लिए हैं कई दावेदार
साल 2018 में हुए चुनाव में तिजारा विधानसभा में चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिला था और बसपा के संदीप यादव ने कांग्रेस उम्मीदवार व पूर्व मंत्री दुर्रू मियां को हराकर विधायक बने थे। संदीप यादव कुछ समय बाद बसपा के अन्य विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इस साल के विधानसभा चुनाव में भाजपा से पूर्व विधायक मामन सिंह यादव व पिछली बार प्रत्याशी रहे पूर्व सभपति संदीप दायमा सहित कई नेता दावेदारी कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस से पूर्व मंत्री दुर्रू मियां व चौधरी फ़ज़ल हुसैन के अलावा कई नए चेहरे दावेदारी पेश कर रहे हैं। कांग्रेस इनके अलावा किसी दूसरे जिताऊ व्यक्ति को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतार सकती है।
बसपा ने ईमरान खान को बनाया प्रत्याशी
बसपा ने पार्टी के प्रदेश महासचिव ईमरान को पहले ही प्रत्याशी घोषित कर दिया और वह गांव-गांव व घर-घर जाकर लोगों से जनसम्पर्क कर रहे हैं। ईमरान खान का गांव-गांव में स्वागत हो रहा है तथा युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं। उनके पांच साल तक जनता के बीच रहकर संघर्ष करने व सामाजिक कार्यों की चर्चा मेवात में हो रही है।



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