Bhiwadi News: बिजली संकट से जूझ रहे भिवाड़ी के उद्योग, बीएमए ने जयपुर डिस्कॉम अधिकारियों को समस्या से कराया अवगत, 33 केवी फीडर और जीएसएस अपग्रेड की मांग

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ncrkhabar@Bhiwadi.ग्रेटर भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती और कमजोर विद्युत अवसंरचना को लेकर उद्योग जगत की चिंता अब खुलकर सामने आने लगी है। बुधवार को भिवाड़ी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (बीएमए) ने जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और रीको के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं और उनके स्थायी समाधान पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में उद्योगों की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चार प्रमुख मांगें रखी गईं। वहीं जयपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता रूप सिंह ने समस्याओं के शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया।

बीएमए सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी जसबीर सिंह राणा ने की। बैठक में पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चौहान, जयपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता रूप सिंह, एक्सईएन (ओ एंड एम) चंद्रेश शर्मा तथा रीको के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक शिव कुमार सहित कई उद्योगपति मौजूद रहे। बैठक में बीएमए अध्यक्ष चौधरी जसबीर सिंह ने कहा कि भिवाड़ी की बिजली ट्रांसमिशन एवं वितरण प्रणाली वर्ष 1982 की योजना पर आधारित है, जबकि वर्तमान में क्षेत्र में छह हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। उद्योगों की संख्या और बिजली की मांग कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन विद्युत ढांचे का उसी अनुपात में विस्तार नहीं किया गया। इसके कारण उद्योगों को बार-बार बिजली कटौती और ओवरलोडिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

बीएमए ने रखीं ये प्रमुख मांगें

बैठक में बीएमए ने जयपुर डिस्कॉम के अधिकारियों के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। एसोसिएशन ने कहा कि भिवाड़ी, खुशखेड़ा और करौली औद्योगिक क्षेत्रों के अधिकांश 33 केवी फीडर ओवरलोड हैं। नए उद्योगों को अलग फीडर लेने के लिए कहा जाता है, जिसमें करीब एक वर्ष का समय लग जाता है। ऐसे में नए फीडर विकसित किए जाएं या मौजूदा फीडरों की क्षमता बढ़ाई जाए।

बीएमए ने नीलम चौक स्थित 132 केवी जीएसएस का बड़े स्तर पर आधुनिकीकरण करने की भी मांग की। एसोसिएशन का कहना है कि करीब 30 वर्ष पुराने इस जीएसएस के अधिकांश उपकरण पुराने हो चुके हैं और वर्तमान औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप इसे अपग्रेड करना जरूरी है। इसके अलावा रीको द्वारा विकसित नए औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े प्लॉटों के लिए 33 केवी बिजली लाइन की योजना शामिल करने, अधिक क्षमता वाले कंडक्टर लगाने तथा बिजली व्यवस्था के नियमित रखरखाव के लिए तय मेंटेनेंस शेड्यूल लागू करने की मांग भी उठाई गई। बीएमए पदाधिकारियों ने कहा कि एक ओर राजस्थान सरकार औद्योगीकरण को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध नहीं हो रही है। उन्होंने जयपुर डिस्कॉम अधिकारियों से आग्रह किया कि बिजली कटौती और विद्युत संसाधनों से जुड़े मुद्दों को राज्य सरकार के समक्ष प्राथमिकता के साथ रखा जाए, ताकि उद्योगों की समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके।

अधीक्षण अभियंता ने दिया समस्या के समाधान का भरोसा

जयपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता रूप सिंह ने उद्योगपतियों की सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि बार-बार बिजली कटौती और अन्य तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जयपुर में बैठक कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उद्योगों की समस्याओं के शीघ्र निराकरण का आश्वासन भी दिया। बैठक में बीएमए के मानद सचिव जी.एल. स्वामी, मानद सचिव योगेश जैन, उपाध्यक्ष दीपक शर्मा, राजीव रंजन, राजवीर सिंह, अनुपम शुक्ला, अरुण त्यागी, उदयेश्वर मिश्रा, मनीष सिंह, संयुक्त मानद सचिव महेश चंद प्रजापत सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति उपस्थित रहे।

भिवाड़ी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (बीएमए) की बैठक के दौरान जयपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता रूप सिंह का स्वागत करते बीएमए अध्यक्ष चौधरी जसबीर सिंह राणा, पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चौहान, मानद सचिव जी एल स्वामी एवं अन्य पदाधिकारी

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