
ncrkhabar@Jaisalmer/Newdelhi राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard) के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को डेजर्ट नेशनल पार्क के सम क्षेत्र में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को वन्य क्षेत्र में छोड़ा। इस दौरान राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
करीब एक दशक की मेहनत का परिणाम
भूपेंद्र यादव ने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को राजस्थान के रेगिस्तान में फिर से स्थापित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और ग्राउंड स्टाफ के करीब एक दशक के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने जीआईबी और अन्य प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक समुदाय को सहयोग और प्रोत्साहन देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
दो जीआईबी को जंगल में छोड़ना भारत के बस्टर्ड रिकवरी प्रोग्राम के लिए अहम चरण माना जा रहा है। अब तक संरक्षण-प्रजनन के जरिए व्यवहार्य आबादी तैयार करने पर जोर था, जबकि अब पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में दोबारा स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
सैम और रामदेवरा में 97 जीआईबी
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की संयुक्त पहल के तहत जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में संरक्षण प्रजनन, आवास प्रबंधन, खतरों को कम करना, आवास बहाली और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर काम किया जा रहा है।
सैम और रामदेवरा स्थित जीआईबी संरक्षण केंद्रों में फिलहाल 97 पक्षी हैं। इनमें 40 पक्षी जंगली अंडों से पैदा हुए हैं, जबकि 57 का पालन कैद में किया गया है। इनमें से 86 पक्षियों को संरक्षण-प्रजनन के लिए रखा गया है और 11 को वन्य क्षेत्र में छोड़ने के लिए चिन्हित किया गया है। इन्हीं में से दो नर जीआईबी को अब डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़ा गया है।
2025 में 24 और 2026 में 29 चूजे
संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम से भी महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2025 में 24 और वर्ष 2026 में 29 जीवित चूजे प्राप्त हुए। इसके अलावा जीआईबी संरक्षण में ‘जंपस्टार्ट’ जैसी वैज्ञानिक पहल का इस्तेमाल किया गया।
इस तकनीक के तहत कैप्टिव-लेड अंडों को जंगली घोंसलों में रखा गया, जिन्हें मादा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ने स्वीकार किया। इससे राजस्थान में छह और गुजरात में दो चूजों का सफल जन्म हुआ।
200 वर्ग किलोमीटर घासभूमि का संरक्षण
जीआईबी के प्राकृतिक आवास को मजबूत करने के लिए राजस्थान वन विभाग डेजर्ट नेशनल पार्क में आवास पुनर्स्थापन का काम भी कर रहा है। इसके तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बाड़युक्त घासभूमि बाड़े विकसित किए जा रहे हैं।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के दीर्घकालिक टेलीमेट्री अध्ययन में इन क्षेत्रों को ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के प्रमुख प्रजनन आवास के रूप में चिन्हित किया गया है। जीआईबी संरक्षण से जुड़े कार्य विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ाए जा रहे हैं।


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