भिवाड़ी में ‘जहर’ बन रहा मेडिकल वेस्ट: खुले में फेंका जा रहा अस्पतालों का कचरा, लोगों और जानवरों की सेहत पर मंडराया खतरा

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NCRkhabar@Bhiwadi. देश भर में ‘स्वच्छ भारत मिशन’. (Swachh Bharat Mission) की मुहिम चल रही है, लेकिन भिवाड़ी में इस मिशन की धज्जियां उड़ रही हैं। यहां के अस्पताल और क्लीनिक बायो मेडिकल वेस्ट (Bio Medical West) को खुले में फेंक रहे हैं, जिससे पर्यावरण और लोगों की सेहत को गंभीर खतरा हो रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त आदेशों के बावजूद, यह लापरवाही जारी है और प्रशासन इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
भिवाड़ी के मिलकपुर गुर्जर गांव से राजस्थान आवासन मंडल के नवनिर्मित फ्लैटों की तरफ जाने वाले रास्ते पर जगह-जगह काले रंग की प्लास्टिक की थैलियों में भरा हुआ जैविक कचरा फेंका गया है। इसमें सिरिंज, खून से सनी पट्टियां और अन्य मेडिकल सामग्री है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि आवारा पशु, खासकर गाय और कुत्ते इस कचरे को खा रहे हैं, जिससे उनमें गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। रात के अंधेरे में कोई अज्ञात व्यक्ति इस कचरे को फेंक जाता है और सुबह तक यह सड़क पर बिखरा हुआ मिलता है।
स्थानीय उद्योगपति राजवीर दायमा ने बताया कि गुरुवार सुबह खुले में बायो मेडिकल वेस्ट देखकर उन्होंने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) के क्षेत्रीय अधिकारी अमित जुयाल को सूचित किया तो उन्होंने तुरंत मौके पर टीम भेजकर जायजा लिया। शुक्रवार को अस्पताल संचालकों के साथ एक बैठक बुलाई गई है, जिसमें जैविक कचरे के सही निस्तारण को लेकर चर्चा की जाएगी।

जैविक कचरा क्यों है इतना खतरनाक?

अस्पतालों और क्लीनिकों से निकलने वाला जैविक कचरा बेहद संक्रामक होता है। इसमें खतरनाक सूक्ष्मजीव, बैक्टीरिया और वायरस हो सकते हैं, जो सीधे संपर्क में आने पर कई तरह की बीमारियां फैला सकते हैं। इस कचरे में जहरीले रसायन भी हो सकते हैं, जिनके संपर्क में आने से त्वचा में जलन और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यदि इस कचरे का सही तरीके से प्रबंधन न किया जाए, तो यह मिट्टी, पानी और हवा को प्रदूषित कर सकता है। खुले में फेंका गया यह कचरा जमीन में रिसकर भूजल को भी दूषित कर सकता है, जिससे पीने का पानी असुरक्षित हो सकता है। यह गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।
फिलहाल, भिवाड़ी के अस्पतालों का बायो मेडिकल वेस्ट आमतौर पर अलवर भेजा जाता है। इसके बावजूद खुले में फेंका गया यह कचरा प्रशासन की लापरवाही और निगरानी में कमी को दर्शाता है। इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है, ताकि लोगों और जानवरों की सेहत को बचाया जा सके और पर्यावरण को स्वच्छ रखा जा सके।

मिलकपुर गुर्जर गांव के पास जैविक कचरा मिलने के बाद टीम भेजकर जानकारी ली गई है। शुक्रवार को अस्पताल संचालकों के साथ मीटिंग कर अस्पतालों से निकलने वाले जैविक कचरे के निस्तारण को लेकर चर्चा की जाएगी।
-अमित जुयाल, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल भिवाड़ी

मिलकपुर गुर्जर गांव के पास सड़क किनारे फेंका गया बायोमेडिकल वेस्ट

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