

ncrkhabar@New Delhi. कृषि और पर्यावरण मंत्रालय के साझा प्रयास से एक बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। अब देश की लिक्विड डिस्चार्ज पॉलिसी के तहत 65% उपचारित जल (Treated Water) का उपयोग सिंचाई के लिए अनिवार्य किया जाएगा। इस निर्णय से न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में भी नई क्रांति आएगी।
कृषि मंत्री और पर्यावरण मंत्री की अहम बैठक
नई दिल्ली में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण, ट्रीटेड वॉटर के उपयोग और मंत्रालयों के बीच तालमेल जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक में लिया गया फैसला
बैठक के बाद मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विक्रम सिंह, अतिरिक्त सचिव नरेश पाल गंगवार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यहीं पर 65% ट्रीटेड वॉटर सिंचाई में अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया।
किसानों को सीधा फायदा
- खेतों में सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।
- भूमिगत जल पर निर्भरता घटेगी।
- शहरी और औद्योगिक स्तर पर निकलने वाले उपचारित जल का बेहतर उपयोग होगा।
- प्रदूषण पर नियंत्रण और जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा।
पर्यावरण और कृषि का समन्वय
विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत कृषि (Sustainable Agriculture) दोनों को मजबूती देगी। इससे देशभर में किसानों को नई उम्मीद और जल संकट से राहत मिलेगी।

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