

ncrkhabar@Bhiwadi.विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी नई अधिसूचना के विरोध में सोमवार को भिवाड़ी में विभिन्न विप्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विप्र समाज के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने एडीएम कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के पश्चात विप्र संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) सुमित्रा मिश्र को राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से संगठनों ने अधिसूचना को एकतरफा और असंतुलित बताते हुए इसे संविधान के समान अवसर के सिद्धांत के विरुद्ध करार दिया।
समान अवसर की भावना को कमजोर करने का आरोप
विप्र संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि यह अधिसूचना भारतीय संविधान की मूल भावना एवं समान अवसर के अधिकार को कमजोर करती है, जो संविधान की मूल संरचना का अभिन्न अंग है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक मसौदे में ओबीसी वर्ग को शामिल नहीं किया गया था, जिसे लेकर देशभर में विरोध हुआ। बाद में ओबीसी वर्ग को जोड़ा गया, लेकिन अब भी कई गंभीर खामियां बनी हुई हैं।
झूठी शिकायतों के दुरुपयोग की आशंका
संगठनों ने चिंता जताई कि अधिसूचना में झूठी अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे इसके दुरुपयोग की पूरी संभावना बनी हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में यह अधिसूचना विश्वविद्यालयों में लागू की जा चुकी है, जिसके चलते शैक्षणिक परिसरों में भय, असंतोष और वैचारिक अस्थिरता का माहौल बन रहा है।
शिक्षा और सामाजिक समरसता पर खतरा
विप्र समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस प्रकार की नीतियां शिक्षा के स्वस्थ, निष्पक्ष एवं सकारात्मक वातावरण के विपरीत हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश की अनुमानित 140 करोड़ जनसंख्या में सामान्य वर्ग की बड़ी भागीदारी है और इस वर्ग का देश के विकास, प्रशासन, शिक्षा, उद्योग एवं राजस्व सृजन में ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी नीतियों को वापस नहीं लिया गया, तो यह सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता के लिए घातक सिद्ध हो सकती हैं। प्रदर्शन में अशोक कौशिक (जिलाध्यक्ष, विप्र सेना खैरथल–तिजारा) भूदेव शर्मा (अध्यक्ष, विप्र फाउंडेशन खैरथल–तिजारा) व सोमदत्त शर्मा (उपाध्यक्ष), कंचन तिवारी (भाजपा नेत्री) व पूर्व पार्षद विजय शर्मा सहित बड़ी संख्या में विप्र समाज के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।




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