Tiger Conservation Policy Review: बाघ संरक्षण को लेकर नीतिगत फैसलों की होगी व्यापक समीक्षा, क्षेत्रवार चुनौतियों पर फोकस – Bhupender Yadav

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अलवर में आयोजित बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव।

Ncrkhabar@Alwar/Newdelhi. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि देश में बाघ संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नीतिगत निर्णयों की व्यापक समीक्षा और क्षेत्रवार चुनौतियों की पहचान जरूरी है। उन्होंने बताया कि National Tiger Conservation Authority (NTCA) की अब तक हुई 28 बैठकों में लिए गए सभी फैसलों की समीक्षा की जा रही है।

राजस्थान के alwar में आयोजित बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मंत्री ने कहा कि भारत ने प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह समय नीतियों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप ढालने का है। उन्होंने सुझाव दिया कि पिछले पांच दशकों में लिए गए सभी प्रमुख निर्णयों को एक नीतिगत दस्तावेज के रूप में संकलित किया जाए। सम्मेलन में राजस्थान सरकार के वन मंत्री संजय शर्मा, NTCA के वरिष्ठ अधिकारी, देशभर के बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक शामिल हुए।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि बाघों की संख्या का आकलन, मानव-वन्यजीव संघर्ष, बचाव एवं पुनर्वास व्यवस्था, बाघ अभ्यारण्य निधि के उपयोग और संरक्षण की बुनियादी संरचना को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इन विषयों पर काम करने के लिए चार कार्य समूह गठित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि भारत में चीतों के पुनर्वास की परियोजना सफल रही है और यह अब तीसरी पीढ़ी तक पहुंच चुकी है। बोत्सवाना से चीतों का एक नया समूह फरवरी के अंत तक भारत आने की संभावना है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस का गठन किया गया है, जिससे अब तक 24 देश जुड़ चुके हैं। इस मंच के माध्यम से बढ़ती गर्मी, भूमि का मरुस्थलीकरण और जैव विविधता के नुकसान जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकलने की घटनाओं को देखते हुए मजबूत और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की आवश्यकता है। घायल वन्यजीवों, मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामलों और अनाथ शावकों के लिए बाघ अभ्यारण्यों के आसपास मानकीकृत बचाव, उपचार और पुनर्वास केंद्र विकसित किए जाने चाहिए।

 

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