

Ncrkhabar@Bhiwadi.खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके में जिंदा जलकर जान गंवाने वाले सातों श्रमिकों के शव डीएनए मिलान के बाद शनिवार को उनके परिजनों को सौंप दिए गए। मृतकों में दो नाबालिगों के शामिल होने से फैक्ट्री में बाल श्रम के आरोप भी गंभीर हो गए हैं। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद उसका मिलान होने पर एंबुलेंस से शव बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के लिए रवाना कर दिए गए हैं। एंबुलेंस रविवार को गांवों में पहुंचेगी, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। हादसे में जान गंवाने वाले सभी श्रमिक पूर्वी चंपारण जिला के विभिन्न प्रखंडों के निवासी थे। मृतकों में मिंटू कुमार पुत्र सिकन्दर पासवान निवासी नगरवा टोला, वार्ड नंबर 012, अंचल घोड़ासहन; सुजन्त कुमार पुत्र शिवजी पासवान निवासी हराज टोला, नारायणपुर, अंचल चिरैया; श्याम कुमार पुत्र राजदेव पासवान; अभिषेक कुमार पुत्र राजेन्द्र सिंह; अमरेश कुमार (17 वर्ष) पुत्र कृष्णा राम निवासी मटियरिया, अंचल हरसिद्धि; रवि कुमार पुत्र रामदत्त राम निवासी मुरारपुर तथा मंटु कुमार (14 वर्ष) पुत्र रामसुन्दर राम निवासी मुरारपुर, अंचल हरसिद्धि शामिल हैं। सभी मृतक पूर्वी चंपारण जिले के रहने वाले थे। गौरतलब है कि 16 फरवरी को खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में सात श्रमिकों की मौत हो गई थी। शव बुरी तरह जल जाने के कारण उनकी पहचान संभव नहीं हो सकी, जिसके चलते डीएनए परीक्षण कराया गया। परिजनों के सैंपल लेकर उन्हें राजस्थान राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था। डीएनए रिपोर्ट में देरी तकनीकी कारणों से हुई। सूत्रों के अनुसार, जले हुए शवों से डीएनए प्रोफाइल स्पष्ट रूप से प्राप्त करने में कठिनाई आई, जिससे प्रारंभिक मिलान संभव नहीं हो सका। इसके बाद दोबारा सैंपल लेकर पुनः जांच के लिए भेजा गया। प्रयोगशाला में लंबित मामलों और सैंपल की गुणवत्ता प्रभावित होने के कारण भी प्रक्रिया में समय लगा। शनिवार शाम अंतिम रिपोर्ट आने के बाद शवों की शिनाख्त सुनिश्चित की गई और उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है, वहीं अवैध फैक्ट्री संचालन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर जांच जारी है।



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