

ncrkhabar@Bhiwadi/Newdelhi. एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने उद्योगों के लिए पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन मानकों को और कड़ा कर दिया है। नए वैधानिक निर्देशों के अनुसार अब चिह्नित उद्योगों के लिए पीएम उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 80 मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर से घटाकर 50 मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर कर दी गई है।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, भिवाड़ी के क्षेत्रीय अधिकारी अमित जुयाल ने बताया कि यह नया मानक भिवाड़ी सहित पूरे एनसीआर क्षेत्र में लागू होगा। उन्होंने कहा कि जिन उद्योगों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अत्यधिक प्रदूषणकारी श्रेणी में रखा गया है, उन्हें तय समय-सीमा के भीतर संशोधित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। यह नियम सीपीसीबी द्वारा चिन्हित 17 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों, रेड कैटेगरी के मध्यम और बड़े वायु-प्रदूषणकारी उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, बायलर या थर्मिक फ्लूइड हीटर संचालित टेक्सटाइल इकाइयों तथा भट्टी आधारित मेटल उद्योगों पर लागू होगा। जिन इकाइयों के लिए पहले से ही 50 mg/Nm³ से कम का मानक निर्धारित है, उन पर यह नया निर्देश लागू नहीं होगा। अमित जुयाल ने बताया कि यह निर्णय आईआईटी कानपुर के अध्ययन और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की तकनीकी समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। आयोग का मानना है कि 50 mg/Nm³ का स्तर तकनीकी रूप से प्राप्त किया जा सकता है और इससे औद्योगिक प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी।
कब से लागू होंगे नए नियम?
बड़े और मध्यम उद्योगों के लिए यह मानक 1 अगस्त से प्रभावी होंगे, जबकि अन्य इकाइयों के लिए 1 अक्टूबर से अनुपालन अनिवार्य होगा। प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने उद्योगों को निर्देश जारी कर दिए हैं और निरीक्षण प्रक्रिया को भी तेज किया जाएगा। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल भिवाड़ी के रीजनल ऑफिसर अमित जुयाल ने स्पष्ट किया कि निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन पाए जाने पर संबंधित इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।



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