NCR Crime News: विदेशी नागरिकों से साईबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार

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आशियाना टाउन सोसायटी के फ्लैट से दो साल से चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर, 7 लैपटॉप, 4 मोबाइल और स्कॉर्पियो बरामद

Crime@ncrkhabar. com-Bhiwadi.भिवाड़ी थाना पुलिस ने अमेरिका के नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट और फर्जी गिरफ्तारी वारंट का डर दिखाकर साइबर ठगी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 लैपटॉप, 4 मोबाइल फोन और वारदात में प्रयुक्त एक स्कॉर्पियो वाहन बरामद किया है। प्रारंभिक जांच में करीब एक लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 96 लाख रुपये) की ठगी का खुलासा हुआ है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहित गुप्ता निवासी द्वारका सेक्टर-8, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली, राहुल सिंह निवासी करावल नगर, उत्तर-पूर्वी दिल्ली तथा जेम्स अनिल मंडल निवासी मोमिनपुर, थाना एकबालपुर, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के रूप में हुई है। तीनों आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से भिवाड़ी के थड़ा गांव स्थित आशियाना टाउन सोसायटी में मुख्य आरोपी मोहित गुप्ता के पिता के फ्लैट में रहकर साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।

पुलिस अधीक्षक बृजेश उपाध्याय ने बताया कि तीनों आरोपी पहले गुरुग्राम की बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत थे। अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ और विदेशी ग्राहकों से बातचीत के अनुभव का फायदा उठाकर उन्होंने साइबर ठगी का गिरोह बनाया। आरोपियों ने आशियाना टाउन में दो फ्लैटों को मिलाकर एक फर्जी कॉल सेंटर तैयार किया, जहां से अमेरिका के नागरिकों को कॉल कर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया जाता था।

अमेरिकी न्याय विभाग का अधिकारी बनकर करते थे कॉल

एसपी ने बताया कि आरोपी खुद को अमेरिकी न्याय विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ितों से संपर्क करते थे। वे फर्जी गिरफ्तारी वारंट, सेटलमेंट नोटिस और डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर लोगों से बैंक खाते, व्यक्तिगत जानकारी और कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच हासिल कर लेते थे। इसके बाद रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर की मदद से पीड़ितों के सिस्टम का नियंत्रण लेकर उनसे रकम ट्रांसफर करवाई जाती थी।

क्रिप्टोकरेंसी में लेते थे रकम

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ठगी की रकम पहले क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से प्राप्त करते थे। बाद में इस राशि को भारतीय मुद्रा में बदल दिया जाता था। अपनी पहचान और वास्तविक लोकेशन छिपाने के लिए वे वीपीएन, वर्चुअल नंबर और हाई-स्पीड इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे। फ्लैट को पूरी तरह कॉल सेंटर की तरह विकसित किया गया था, जहां से विदेशों में लगातार कॉल की जाती थीं।

अमेरिकी दूतावास को दी जाएगी जानकारी

एसपी बृजेश उपाध्याय ने बताया कि मामले की जानकारी अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को साझा की जाएगी, ताकि ठगी के शिकार अमेरिकी नागरिक शिकायत दर्ज करा सकें और जांच में सहयोग मिल सके। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस साइबर ठगी में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा आरोपियों को अमेरिकी नागरिकों का डाटा और संपर्क विवरण कहां से मिलता था।

बृजेश उपाध्याय, एसपी भिवाड़ी

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