देश में न्यायिक व्यवस्था के सामने राजस्थान ने पेश किया सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण  

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NCRkhabar@Jaipur.  उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चन्द्रचूड (CJI D. Y. Chandrachun) ने कहा कि मानवाधिकारों एवं संवैधानिक मूल्यों के संरक्षक के रूप में देश की न्याय व्यवस्था पर बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ हमारी न्यायिक व्यवस्था को सूचना प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी का अधिक उपयोग करते हुए आमजन में न्याय की पहुंच को और अधिक सुगम बनाना होगा। उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court)  द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने बीते करीब 75 वर्षों में अपने महत्वपूर्ण निर्णयों और फैसलों से न्यायिक प्रणाली में आमजन के विश्वास को और अधिक पुख्ता एवं सुदृढ़ बनाने का काम किया है।

मुख्य न्यायाधीश जयपुर के सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (JECC) में राजस्थान उच्च न्यायालय के प्लेटिनम जुबली वर्ष के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। श्री चन्द्रचूड ने कहा कि राजस्थान ने न्यायिक क्षेत्र में महिलाओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व एवं लैंगिक समानता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में जिला स्तर पर 1344 न्यायिक अधिकारी हैं, इनमें 562 महिलाएं हैं। उन्होंने विगत वर्षों में प्रदेश में सिविल जज कैडर की विभिन्न परीक्षाओं में चयनित महिला अधिकारियों की बढ़ती संख्या पर खुशी जाहिर की और कहा कि यह देश के अन्य राज्यों के सामने महिला सशक्तीकरण एवं लैंगिक समानता का सुखद उदाहरण है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लीगल प्रोफेशन में डिजीटल तकनीक का उपयोग समय की आवश्यकता बन गई है। इस संदर्भ में उन्होंने भारतीय न्यायिक व्यवस्था में किए जा रहे नवाचारों का उद्धरण देते हुए ई-फाईलिंग, ई-हियरिंग और पेपरलेस कोर्ट की व्यवस्था की दिशा में सुप्रीम कोर्ट की पहल पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के समय वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए ई-हियरिंग की व्यवस्था कायम कर देश के न्यायालयों ने आमजन को न्याय दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
 चन्द्रचूड ने कहा कि बार एवं बैंच न्यायिक व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण अभिन्न अंग हैं और इन पर न्यायिक व्यवस्था के प्रति आमजन के विश्वास को बनाए रखने की महती जिम्मेदारी है। इस क्रम में उन्होंने न्यायिक प्रणाली से संबद्ध सभी पक्षों को पारस्परिक सहयोग एवं जवाबदेही से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री संजय किशन कौल ने कहा कि आम आदमी निराश होकर राहत की अंतिम आशा के साथ न्यायपालिका के समक्ष आता है और राजस्थान उच्च न्यायालय ने समय-समय पर अपने निर्णयों से कॉमन मैन के इस विश्वास को कायम रखा है। उन्होंने मध्यस्थता के जरिए वादों के निस्तारण की दिशा में राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकान्त ने कहा कि स्थापना के 75 वर्ष किसी भी संस्था के लिए ऐसा अवसर है जब वह अपने गौरवपूर्ण इतिहास पर गर्व करता है वहीं भावी चुनौतियों के लिए खुद को तैयार भी करता है। राजस्थान उच्च न्यायालय के लिए भी यह ऐसा ही क्षण है।  सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश एस. रवीन्द्र भट्ट, बेला एम त्रिवेदी तथा पंकज मित्तल ने अपने उदबोधन में राजस्थान उच्च न्यायालय के 75 वर्षों के गौरवपूर्ण सफर की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की न्यायिक प्रणाली में राजस्थान से जुड़े विधिवेत्ताओं, न्यायाधीशों एवं अधिवक्ताओं ने अतुलनीय योगदान दिया है।
राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह ने अपने स्वागत उद्बोधन में राजस्थान हाईकोर्ट के 75 वर्ष के गौरवमयी सफर, उपलब्धियों एवं आमजन को सरल एवं सुगम न्याय प्रदान करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
समारोह में राजस्थान हाईकोर्ट प्लेटिनम जुबली के ई-लोगो और मोटो, कॉमर्शियल कोर्ट्स में पेपरलैस कार्य व्यवस्था, राजस्थान उच्च न्यायालय के टेलीग्राम चैनल, जोधपुर हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बैंच की फोटो गैलरी एवं वर्चुअल फोटो गैलरी वॉल का उदघाटन किया गया। इस अवसर पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संदीप मेहता, राज्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट एवं विभिन्न हाईकोर्ट्स के पूर्व न्यायाधीश, मुख्य सचिव उषा शर्मा, पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा, महाधिवक्ता एमएस सिंघवी, एडीशनल सॉलिसिटर जनरल राजदीपक रस्तोगी सहित बार एवं बैंच के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित थे।

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