खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में गंदगी व जलभराव से उद्यमी परेशान

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NCRkhabar@Bhiwadi. खुशखेड़ा-कारोली औद्योगिक क्षेत्र (Khushkheda Karoli Industrial Area) की औद्योगिक मानचित्र पर अलग पहचान है और यहां पर सात सौ से ज्यादा उद्योगों में लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। देश के कोने-कोने से लोग यहां पर रोजगार की तलाश में आते हैं। उद्योगों के स्थापित होने से ना सिर्फ सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व मिलता है बल्कि स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में जापान की मशहूर दुपहिया व चार पहिया वाहन बनाने वाली कंपनी होंडा कार्स व टू व्हीलर व अन्य विदेशी कंपनियों के आने से बड़ी संख्या में ऑटो पार्ट्स बनाने वाले उद्योग स्थापित हुए हैं। यहां पर श्री सीमेंट, एसबीएफ इस्पात, युटाका, ओकिनावा सहित अन्य बड़े उद्योग स्थापित हैं। दिल्ली-एनसीआर के उद्यमियों के आने की वजह से जमीनों की कमी पड़ने लगी तो राज्य सरकार ने कारोली व सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किए, जहां पर उद्योगों में उत्पादन शुरू हो गया है। भिवाड़ी, नीमराणा, बावल, धारुहेड़ा व मानेसर की फैक्ट्रियों से कच्चा व तैयार माल यहां के उद्योगों में आता है।
जलभराव व चिकित्सा की कमी से जूझ रहा औद्योगिक क्षेत्र
खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। यहां पर ईएसआई अस्पताल तो दूर डिस्पेंसरी भी नहीं है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक प्रतिमाह ईएसआईसी
 में अंशदान करते हैं लेकिन उन्हें चिकित्सा सुविधा के लिए मटीला या भिवाड़ी जाना पड़ता है, जहां से गंभीर मरीजों को अलवर रैफर कर दिया जाता है। थोड़ी सी बारिश होने पर सड़कों पर पानी भर जाता है, जिससे आवागमन में परेशानी होती है। नालों की सफाई समय पर नहीं होती है और जगह-जगह कचरे का ढेर दिखाई देता है। भिवाड़ी सीईटीपी से पानी आता है और यहां खाली प्लॉटों में गंदा पानी भरने से मौसमी बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है। यहां तकरीबन पचास बीघा से अधिक भूमि पर गंदा पानी भरा हुआ है।
खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में एकत्र गंदा पानी।
सलारपुर में नहीं बना डीएफसी रेलवे स्टेेेशन
सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र से होकर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियों का आवागमन शुरू हो गया है लेकिन यहां पर रेलवे स्टेशन नहीं बनाया गया है। तकरीबन सात-आठ साल पहले यहां पर रेलवे स्टेशन बनाया जाना प्रस्तावित था लेकिन 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद केंद्र व राज्य में अलग-अलग सरकार बन गई और यहां पर रेलवे स्टेशन का प्रस्ताव रदद् कर रेवाड़ी व मेवात जिलों में स्टेशन बना दिया गया। अब यहां के उद्यमियों को हरियाणा में जाकर मॉल का आवागमन करना पड़ेगा। उद्यमियों की मांग है कि सलारपुर में रेलवे स्टेशन बनाया जाए, जिससे मॉल के आवागमन में सुविधा हो सके।
-उद्योगों के विकास के लिए भिवाड़ी को जिला बनाया जाए। इसके साथ ही आईटी के लिए स्पेशल इकॉनोमिक जोन बनाया जाना चाहिए, जिससे ना सिर्फ औद्योगिक विकास होगा बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर को भी गति मिलेगी। यहां स्थित उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों की ईएसआईसी की सुविधा नहीं मिल पा रही है और ज्यादा बीमार होने  पर अलवर रैफर करना पड़ता है।  खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में  चिकित्सा सुविधा का अभाव है। सड़कों के दोनों तरफ गन्दगी व पानी भरा रहता है। यहां पर चिकित्सा सुविधा अच्छी होनी चाहिए। उच्च शिक्षा व चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में ज्यादातर उद्यमी गुरुग्राम  में रहते हैं। भिवाड़ी व गुरुग्राम से खुशखेड़ा आने वालों को टोल देना पड़ता है। इसलिए नगर परिषद की सीमा से टोल प्लाजा हटाना चाहिये।
  -के. आर. शर्मा, महासचिव बीसीसीआई एवं एमडी गायत्री फर्टिप्लान्टस इंटरनेशनल प्रा. लि. खुशखेड़ा
– खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में भिवाड़ी सीईटीपी का पानी आता है और पिछले चार साल से 50 बीघा भूमि में पानी भरा गया। खुशखेड़ा, कारोली व सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र में बारह सौ प्लाट हैं, जिसमें से सात सौ उद्योग स्थापित हैं लेकिन बिजली की समस्या बरकरार है। होंडा चौक पर स्थित जीएसएस पर दबाव ज्याद  है। इसलिए नए जीएसएस का निर्माण तय अवधि में होना चाहिए, क्योंकि गर्मी में लोड बढ़ने पर फाल्ट होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट बेच दिया गया  लेकिन विद्युत व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है।
उमेद सिंह, महासचिव केकेआईए खुशखेड़ा।
– खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यहां पर सात सौ से अधिक उद्योगों में बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते हैं लेकिन चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। ईएसआई काटने के बावजूद श्रमिकों की चिकित्सा के लिए डिस्पेंसरी भी नहीं खोली गई है। ऐसे में श्रमिकों को बीमार होने पर ईएसआईसी अस्पताल भिवाड़ी जाना पड़ता है लेकिन स्थिति ज्यादा खराब होने पर वहां से भी अलवर रैफर कर दिया जाता है। इसलिए यहां पर
चिकित्सा उपलब्ध करवाने के साथ गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल में ईलाज की सुविधा दी जाए।
-आनंद अग्रवाल, उद्यमी, खुशखेड़ा।
खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में रीको का प्लॉट बना डंपिंग यार्ड।

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