अरावली पर खनन का वार, अवशेषों में सिमट गई कहरानी की पहाड़ी

SHARE:

ncrkhabar@Bhiwadi.अरावली पर्वत श्रृंखला का एक अहम हिस्सा रहा कहरानी गांव आज अवैध खनन के दुष्परिणामों की गवाही दे रहा है। क्षेत्र में फिलहाल अवैध खनन बंद है, लेकिन वर्षों तक हुए अंधाधुंध खनन ने अरावली की पहाड़ियों को इस कदर नुकसान पहुंचाया कि अब वे सिर्फ अवशेषों में सिमटकर रह गई हैं। कभी हरियाली से आच्छादित और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने वाली पहाड़ियां अब पहचान खो चुकी हैं। अवैध खनन से कहरानी सहित आसपास के क्षेत्रों की कई पहाड़ियों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। इस गंभीर स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी तल्ख टिप्पणी कर चुका है और अरावली क्षेत्र में खनन को पर्यावरण के लिए घातक बताते हुए सख्त निर्देश दिए हैं। बावजूद इसके, लंबे समय तक जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का प्रभावी पालन नहीं हो सका, जिसका खामियाजा आज कहरानी भुगत रहा है।

खनन बंद, लेकिन खतरे अब भी कायम

ग्रामीणों का कहना है कि खनन बंद होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन पुराने खनन स्थलों पर बने गहरे गड्ढे आज भी जानलेवा बने हुए हैं। बारिश के मौसम में इनमें पानी भर जाता है। कहरानी के साथ-साथ खोरीकलां और चुहड़पुर क्षेत्रों में ऐसे गड्ढों में नहाने या खेलने के दौरान पैर फिसलने से पहले कई बच्चों की जान जा चुकी है लेकिन इसके बावजूद कहीं पर भी चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं।

ग्रामीणों की मांग: सुरक्षा और स्थायी समाधान

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल खनन बंद कराना ही पर्याप्त नहीं है। पुराने खनन स्थलों को सुरक्षित किया जाए, गड्ढों को भरवाया जाए, चारदीवारी और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। साथ ही यदि भविष्य में खनन की अनुमति दी जाती है तो वह पर्यावरणीय नियमों के तहत वैध लीज के माध्यम से ही हो, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सके।

2012 की कार्रवाई से रुका था खनन

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद क्षेत्र में खनन पर काफी हद तक रोक लगी। वर्तमान में प्रशासनिक निगरानी के चलते कहरानी में अवैध खनन गतिविधियां बंद हैं, लेकिन पहले हुए नुकसान की भरपाई अब तक नहीं हो सकी है। अरावली पर्वत श्रृंखला दिल्ली से गुजरात तक करीब 670 किलोमीटर में फैली हुई है। यह थार मरुस्थल को आगे बढ़ने से रोकने के साथ-साथ एनसीआर क्षेत्र के लिए प्राकृतिक ढाल और फेफड़ों का काम करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बचे हुए पहाड़ी अवशेषों को संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में क्षेत्र को गंभीर जल संकट और प्रदूषण का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने बचाई एक पहाड़ी

हरला की ढाणी गोधान निवासी मोहन बिधूड़ी ने बताया कि पहले कहरानी के आसपास अरावली की पहाड़ियां हरियाली से ढकी रहती थीं, लेकिन अब केवल उनके अवशेष ही दिखाई देते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी ढाणी के पास स्थित पहाड़ी में अवैध खनन के प्रयास हुए थे, लेकिन ग्रामीणों की एकजुटता से खनन नहीं होने दिया गया, जिससे उस पहाड़ी को सुरक्षित बचाया जा सका।

 

Leave a Comment

Our Visitor

4 5 6 3 1 8
Users Today : 71
Total Users : 4563185
Views Today : 81
Total views : 4579471
Read More