

ncrkhabar@Gurugram/Bhiwadi.सोमवार की सुबह हरियाणा के सिद्धरावली में कुछ मजदूरों के लिए बिल्कुल सामान्य थी। वे रोज की तरह निर्माण स्थल पर काम करने पहुंचे थे। किसी ने घर फोन कर कहा था कि शाम को फिर बात करेंगे, तो किसी ने बच्चों की फीस और परिवार के खर्च के लिए पैसे भेजने की योजना बनाई थी। उन्हें क्या पता था कि कुछ ही घंटों बाद उनका यह साधारण दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन बन जाएगा। गुरुग्राम के सिद्धरावली में Signature Global की निर्माणाधीन सोसायटी में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान अचानक मिट्टी का बड़ा हिस्सा धंस गया। बेसमेंट की खुदाई के दौरान हुए इस हादसे में वहां काम कर रहे कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। कुछ ही क्षणों में निर्माण स्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाकर मजदूरों को बाहर निकाला गया। गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को इलाज के लिए भिवाड़ी के जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद सात मजदूरों को मृत घोषित कर दिया।
जिला अस्पताल भिवाड़ी के प्रभारी डॉ. सागर अरोड़ा ने बताया कि सिद्धरावली स्थित सिग्नेचर ग्लोबल सोसायटी से सात घायल श्रमिकों को अस्पताल लाया गया था, लेकिन जांच के दौरान सभी मृत पाए गए। फिलहाल उनकी पहचान पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है और यह भी पता नहीं चल पाया है कि वे किस स्थान के रहने वाले थे। मामले की सूचना हरियाणा पुलिस को दे दी गई है और पुलिस उनकी पहचान और अन्य तथ्यों की जांच में जुटी है।
एक माह में दो बड़े हादसे, 16 मजदूरों की गई जान
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब एनसीआर क्षेत्र हाल ही में हुए एक और दर्दनाक हादसे से उबर भी नहीं पाया था। राजस्थान के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग लगने से नौ मजदूरों की मौत हो गई थी। उस घटना को अभी एक माह भी पूरा नहीं हुआ है और अब गुरुग्राम के इस हादसे ने फिर कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। एक माह के भीतर एनसीआर में दो बड़े हादसों में 16 प्रवासी मजदूरों की मौत ने औद्योगिक और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रोजी-रोटी की तलाश में आए थे NCR
बताया जा रहा है कि इन मजदूरों में से कई दूर-दराज के गांवों से रोजी-रोटी की तलाश में एनसीआर आए थे। कोई अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए मेहनत कर रहा था तो कोई बूढ़े माता-पिता का सहारा था। लेकिन एक पल में आए इस हादसे ने कई परिवारों के सपने और उम्मीदें छीन लीं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बेसमेंट खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने से यह हादसा हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के निर्माण कार्यों में तकनीकी निगरानी और सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी होते हैं। हादसे के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि जिन मजदूरों के हाथों से शहरों की ऊंची इमारतें और उद्योग खड़े होते हैं, उनकी अपनी जिंदगी अक्सर सबसे ज्यादा जोखिम में होती है।

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