ग्रेप में भी नहीं सुधरी भिवाड़ी की हवा, बर्फीली सर्दी और प्रदूषण ने बिगाड़ी जनजीवन की रफ्तार

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ncrkhabar@Bhiwadi. दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू होने के बावजूद भिवाड़ी के लोगों को स्वच्छ हवा नसीब नहीं हो सकी। अक्टूबर से दिसंबर तक शहर की वायु गुणवत्ता लगातार खराब बनी रही, जिससे जनजीवन की रफ्तार थम सी गई। आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में दिक्कत अब आम बात हो गई है। सुबह की सैर, बच्चों का स्कूल जाना और दफ्तर के लिए निकलना तक लोगों के लिए चुनौती बन गया। अक्टूबर माह में हालात बेहद चिंताजनक रहे। इस दौरान तीन दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 से 400 के बीच दर्ज किया गया, जबकि 13 दिन एक्यूआई 200 से 300 के बीच रहा। केवल एक दिन ऐसा रहा जब एक्यूआई 190 दर्ज हुआ और लोगों को कुछ राहत मिली। नवंबर माह में भी स्थिति ज्यादा नहीं सुधरी। पांच नवंबर को एक्यूआई 93 के साथ हवा अपेक्षाकृत स्वच्छ रही, जबकि सात नवंबर को एक्यूआई 199 दर्ज किया गया। इसके अलावा 11 दिन एक्यूआई 200 से 300 के बीच और 17 दिन एक्यूआई 300 से ऊपर रहा। दिसंबर माह में भी प्रदूषण का ग्राफ नीचे नहीं आया। इस महीने 21 दिन एक्यूआई 200 से 300 के बीच और 10 दिन एक्यूआई 300 से ऊपर दर्ज किया गया। लगातार खराब वायु गुणवत्ता का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अस्पतालों में दमा, सांस की बीमारी, एलर्जी, आंखों और त्वचा से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों की क्षमता कम होती है और हृदय व श्वसन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे अधिक पड़ रहा है।

बर्फीली हवाओं से जनजीवन अस्तव्यस्त

साल के आखिरी दिन हालात और भी खराब हो गए। एक ओर शहर की हवा बेहद खराब श्रेणी में बनी रही, वहीं दूसरी ओर बर्फीली हवाओं ने सर्दी का असर बढ़ा दिया। सर्दी और वायु प्रदूषण के डबल अटैक से जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। सुबह से ही शहर पर घना कोहरा और धुंध छाई रही। ठंडी हवाओं के कारण लोग घरों से निकलने में हिचकिचाते नजर आए और खुले में काम करने वाले मजदूरों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। प्रदूषण को रोकने में प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। ग्रेप लागू होने के बावजूद औद्योगिक इकाइयों, निर्माण कार्यों में धूल नियंत्रण, कचरा जलाने पर रोक और भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका। सड़कों पर उड़ती धूल और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलता धुआं हालात को और बिगाड़ता रहा।

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